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Hi guys, I am Anil Kumar Shukla, 43 years old and totally obsessed with Technology. My hobbies are Blogging, Internet Marketing, Movies, Playing PC games, Travelling, Music and Painting. At this site I will try to make your life easier as Tech-Communist and hopefully we will learn together.
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Managing Director
Mr. N. D. Tilekar is The Managing Director having experience in the field of Marketing. He was General Manager of one of the Marketing Company having business in India as well as abroad also. Touching the common man and his problems with elevating the same for solution. Young, dynamic and experienced with an ambition to create ones own identity .
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12/31/2013 10:30:12
anil1101

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छोटा सा कान मंत्र मेरे किसान बंधुओं के लिए ।

    भारत एक कृषि प्रधान देश है। खेती ही अपना बिवसाय है। और ज्यादातर हम खेती पर ही निर्भर है। और हमारी खेती प्रकर्ति पर निर्भर है। प्रकर्ति यानि जमीन,पानी,धूप,हवा,बारिश और सूर्य की रोशनी ये सब घटक एकदूजे से संबन्धित हैं।
उसमें से जमीन के बारे में हम कितना जाग्रत हैं ये सोच ये लेख का ऊदेश्या है। जमीन से हम फसल काटते हैं। और इस लिए खादों का इस्तेमाल करते है
जमीन को हम भूमाता जैसे बड़े शब्दों से बहुमान देते है। पर वास्तविकता में उसकी कदर हम नहीं करते हैं। जमीन की देखभाल और व्यवस्थापन ठीक तरह से न हो पाने के कारण इन चीजों का पूरा-पूरा फायदा नहीं होता है।
    जमीन का स्तर और खादों का बहुत नजदीकी सम्बंध होता है। पहले सेन्द्र्य (जैविक) या (Organic) खाद का था। दूसरे महायुद्ध के बाद रासायनिक खादों का उपयोग बड़ी मात्रा में शुरू हुआ। इसके बाद हमें आजादी मिली। इसी दौरान भारत जैसी अनाज की कमियाँ अन्य देशों में उत्पन्न हुईं। ज्यादा धान की उपज करो जैसी मोहिम चलाई गई। एफ॰ ए॰ ओ॰ इस संस्था ने ये मुहिम चलाते वक्त बड़ी आर्थिक और तांत्रिक मदत की। अन्न्धान का उत्पादन बढ़ाने के लिए रासायनिक खाद और कीटनाशक के इस्तेमाल की गति बढ़ गई।
  रासायनिक खादों के ज्यादा इस्तेमाल से फसलों की रोगप्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो गई। जानकारों की राय और अनुभव ये बताने लगे है,कि सेन्द्र्य (जैविक) या (Organic) खादों का बिकल्प नहीं है। अतः रासायनिक खादों को अब टालना बहुत जरूरी हो गया है। अन्यथा उसके बुरे परिणाम हम आज भुगत रहे है और भविष्य में और भी भयंकर होंगे। रासायनिक खाद और कीटनाशक के कारण प्रकृतिक संतुलन ढल रहा है। प्रकृतिक पदार्थ,सेन्द्र्य खाद हानिकारक नहीं होते। ये ज़ोर शोर से बताने का समय आगया है।
    इसी वजह से सेन्द्र्य खादों को नए सिरे से महत्व प्राप्त हो रहा है। उसमें हम सबका सहयोग आवश्यक है। इसी बात कि शिफारिस संशोधक,एवं अन्य संस्थाएं भी करने लगीं हैं। मतलब सेन्द्र्य इस्तेमाल करो !    खेती बचाओ ! !    देश बचाओ ! ! ये नारा सभी सर्वसाधारण किसानों तक पहुचाने का प्रयासहै
 टी एल एग्रो
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